जवान देवर भाभी की पहली रात कैसे गुजरी 🥵
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नमस्ते दोस्तों, आप सब कैसे हो? और स्वागत है आपका फिर से एक इंस्पिरेशनल और मोटिवेशनल कहानी में। आज की कहानी बहुत ही खतरनाक और मोटिवेट है। इस कहानी में बहुत मजा आने वाला है। अंत तक जरूर सुनिए। मैंने अपनी अलमारी से ताकत वाली गोली निकाली जो कभी कबभार रोहन लेते थे और मैं किचन में चली गई। मैंने हल्दी बादाम वाला दूध बॉईल किया और उसमें एक गोली डाल दी ताकि रोहन को थोड़ी ताकत मिल सके। ऐसा करते-करते रात के 10:00 बज चुके थे। फिर मैंने जल्दी से दूध का गिलास लिया और रोहन के कमरे में चली गई। रोहन बड़े ध्यान से
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मेरा इंतजार कर रहे थे। जैसे ही मैं अंदर आई, रोहन खड़े हो गए और मुझे देखने लगे। जब वह कुछ नहीं बोला, तो मैंने ही पूछ लिया, "ऐसा क्या देख रहे हो? बताओ मैं कैसी लग रही हूं?" रोहन ने संकोच में कहा, "भाभी, मन तो ऐसा कर रहा है कि आपको अभी खा जाऊं।" मैंने हंसते हुए उसे दूध का गिलास पकड़ा दिया और कहा, "मुझे खाने की जरूरत नहीं है। बस तुम इसे पी लो।" रोहन ने जल्दी से गिलास पकड़ा और एक सांस में दूध पी गया। दूध पीते ही मेरी हाय दोस्तों। चलो चलिए आपको जल्दी से शुरू से कहानी सुनाती हूं। मेरा नाम नेहा है। मेरी
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उम्र 19 साल है। लेकिन मेरा दिल हमेशा युवा रहता है। और मेरे हाइट लगभग 5 फीट 2 इंच की ऊंचाई के साथ जब मैं साड़ी पहनती हूं तो जैसे सब कुछ ठहर जाता है। मेरी सुंदर रंगत पर जब सूरज की किरण पड़ती है तो लगता है मानो मैं एक चांदनी रात में घूम रही हूं। अब बात करते हैं मेरे 22 साल के देवर की। जो मेरा हो गया है, उसकी मासूमियत और उत्साह ने मेरे मन में एक हलचल सी मचा दी है। जब वह मेरी तरफ देखता है, तो उसकी आंखों में वह खास चमक होती है। जैसे वह किसी खूबसूरत ख्वाब को देख रहा हो। कभी वह मुझसे कहता है भाभी आज आप
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सच में बहुत सुंदर लग रही हैं। इसलिए मेरे पति कभी-कभी दिन में ही मेरा पूजन कर देते हैं। हम गांव में रहते हैं क्योंकि मेरे पति राजू किसान हैं। मेरी 2 साल की एक बेटी भी है इसलिए दूध की थैलियां भी बड़ी हैं। मैं अपने पति का आशीर्वाद समझकर रोज लेती थी। भले ही हमारी शादी को 8 साल हो चुके थे, लेकिन मेरे पति अभी तक मुझसे अच्छा प्यार करते थे। वैसे आमतौर पर उसका रंग काला ही होता है। लेकिन मैं बहुत साफ सफाई रखती थी और कभी कबभार मेकअप भी कर लिया करती थी। पिछले महीने कुछ ऐसा हुआ जिसका हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था। शाम
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को मेरे पति राजू खेत से घर लौट रहे थे। उनके किसी दोस्त की शादी थी इसलिए दोस्तों ने उन्हें थोड़ी पिला दी थी और वह ट्रैक्टर से घर लौट रहे थे। आते वक्त उनका एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उनके एक पैर में फ्रैक्चर हो गया और डॉक्टर ने कहा कि सही होने में कम से कम 6 से 8 महीने लगेंगे। यह सुनकर मेरा मन टूट गया। राजू का दर्द भले ही शारीरिक था, लेकिन मेरे मन में एक गहरी चिंता का सागर उमड़ आया। जब मैंने उन्हें अस्पताल में देखा, उनकी आंखों में दर्द का साया था। मैंने तुरंत उनके पास जाकर उनका हाथ थाम लिया। इसी वजह
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से मेरी ननद और देवर रोहन उन्हें संभालने के लिए आए थे। मेरे ससुर जी और ननद तो वापस चले गए। लेकिन रोहन ने राजू को यहां रुकने के लिए कह दिया क्योंकि वह ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। मुझे ही बाजार से सामान लाने और बाहर के काम करने पड़ते थे। इसलिए मैंने अपनी ननंद को कहकर रोहन को कुछ दिन रुकने के लिए बोल दिया। रोहन मना मान गया और बहुत खुश हो गया। रोहन मेरे कंधे तक ही आता था। शरीर भी ठीक-ठाक था और रंग भी सामान्य था। रोहन ज्यादा बिगड़े किस्म का लड़का नहीं लग रहा था और मैं भी खुश थी कि कोई तो आया जो मेरी मदद कर सके।
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आज रोहन मुझसे थोड़ा-थोड़ा शर्मा रहा था क्योंकि वह शादी के बाद मुझसे पहली बार मिला था। रात को जब मैं राजू को खाना खिला रही थी तब रोहन भी हमारे पास बैठा था। फिर रोहन अपने कमरे में जाकर समय पर सो गया था। राजू के चेहरे पर थोड़ी राहत थी लेकिन अभी भी दर्द में था। तभी मेरे अंदर की भावनाएं बाहर निकल पड़ी। मैंने राजू के पास बैठकर कहा वह भी क्या दिन थे जब आप रोजाना भूत मारा करते थे। राजू यह सुनकर मुस्कुराने लगे। क्या हो गया मेरी रानी? आज तो पूरे मजे में लग रही हो। मैंने कहा नहीं जी आपको तो मजाक लग रहा है और इधर
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मेरी बुरी हालत हो रखी है। सच बताऊं तो इस तरह ना मेरा बुरा हाल हो गया है। मेरे पति बोले मैं तुम्हारा दर्द समझता हूं नेहा मेरा भी बहुत मन करता है लेकिन क्या करूं? मैं तो ठीक से खड़ा भी नहीं हो सकता। बस थोड़े दिन और निकाल लो। फिर देखना मैं इस भूत का क्या हाल करता हूं। तभी मैंने कहा थोड़े दिन नहीं पूरे 6 महीने बाकी है प्लास्टर उतरने में और मेरा तो एक महीने में ही यह हाल हो गया। पता नहीं आगे के दिन कैसे कटेंगे। मेरे पति मेरी उदासी दूर करने के लिए बोले चलो वह नहीं तो कम से दूध ही पिला दो। डॉक्टर ने भी कहा है तभी
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मैंने हंसते हुए कहा आपके नसीब में तो वह भी नहीं है क्योंकि आपकी बिटिया रानी ने पी लिया है। हम दोनों जोर-जोर से हंसने लगे। मेरे पति मुझे खुश रखने की पूरी कोशिश करते थे। लेकिन मैं क्या करूं? सब बेकार था। थोड़ी देर बाद राजू सो गए क्योंकि उनकी दवाइयां में नींद की गोलियां भी थी। लेकिन मुझे नींद कहां आ रही थी। इसलिए मैं खड़ी होकर रोहन के कमरे में देखने चली गई कि वह सोया है या नहीं। लेकिन रोहन अभी तक जाग रहा था और मोबाइल देख रहा था। मैंने उसके कमरे में जाकर कहा, "क्या हुआ रोहन? 11:00 बज चुके हैं और तुम्हें अभी तक नींद नहीं आ रही? सोए
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नहीं? लगता है तुम्हारे मन नहीं लग रहा है। रोहन उठकर बैठ गया और बोला, नहीं भाभी ऐसी बात नहीं है। बस यूं ही फोन देखतेदे लेट हो गया। फिर रोहन ने पूछा, "भाभी, आप भी तो नहीं सोई।" मैंने कहा, "मुझे तो आजकल नींद ही नहीं आती।" रोहन ने पूछा, "क्यों क्या बात हो गई?" मैंने हंसते हुए कहा, नहीं नहीं वह मैं तुम्हें नहीं बता सकती। जब तुम्हारी शादी होगी, तो तुम्हें खुद ही पता चल जाएगा। मेरे मुंह से ऐसा सुनते ही रोहन ने अपनी नजरें नीचे झुका ली और अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगा। तभी मैंने कहा, अरे तुम तो इतनी सी बात पर
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शर्मा रहे। अच्छा बताओ अभी तक कोई लड़की पटाई है या नहीं? रोहन कुछ नहीं बोला। उसे भाभी भी शर्मा रही थी। तभी मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा अरे पागल अपनी भाभी से इतना मत शर्माओ। बात धीरे से बोला भाभी सच बताओ तो ऐसी बातें मैंने अभी तक अपने दोस्तों से भी नहीं की है। मैंने कहा अच्छा तुम मुझे अपना दोस्त ही समझ लो ना क्योंकि मुझे ऐसी बातें करने में बहुत मजा आता है। रोहन ने कहा हां भाभी एक थी लेकिन उसने अभी मेरे से दोस्ती तोड़ दी है। मैंने पूछा तुमने उसकी पिटाई तो कर दी होगी ना? रोहन ने बोला नहीं भाभी सच बताऊं तो मैंने उसे ढंग
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से टच भी नहीं किया था। मैंने मुंह बनाते हुए कहा तुम तो बड़े भोले हो रोहन चलो कोई बात नहीं। अब तुम मेरे पास आ गए हो तो मैं तुम्हें सब सिखा दूंगी। मैं बातें करते-करते रोहन के कमरे में ही सो गई थी। सुबह जब मेरी आंखें खुली तो रोहन बेड पर बैठा हुआ मुझे ही निहार रहा था। मेरे मेरे उठते ही रोहन ने मुझे गुड मॉर्निंग बोला। जब मैंने पूछा क्या देख रहे हो? तो वह बोला भाभी आप सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने मुस्कुराते हुए बोला अच्छा तो अब तुम सुबह-सुबह खूबसूरती का नजारा ले रहे हो और रात को तो बड़े शर्मा रहे थे। रोहन
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मुस्कुराकर पूछने लगा। भाभी आप बुरा ना मानो तो एक बात पूछ सकता हूं। मैंने कहा अरे पागल मैं क्यों बुरा मानूंगी? पूछो क्या पूछना है? रोहन मुझसे कहने लगा भाभी सच-सच बताना आप जो ढाई ढाई किलो के वजन अपने पास लिए घूमती हो आपको भारी नहीं लगता क्या उसकी अब बात सुनकर मेरी हंसी छूट गई। इसके बाद रोहन मुझसे काफी खुल गया और अब वह मुझसे ज्यादा शर्म नहीं आ रहा था। इससे भी बहुत खुश थी क्योंकि अब मेरे भी समय अच्छे से कटने लगे थे। रोहन को हुए आए हुए 12 से 14 दिन बीत चुके थे और वह मुझसे काफी घुल मिल गया था। वह बाहर के
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सारे काम कर देता। बाजार से सामान ले आता और अपने भैया को भी घुमा देता। मेरी तो बहुत सेवा करने लगा था। शाम को मेरा सिर भी दबा देता और कभी-कभी मेरे शरीर को भी आराम देता। लेकिन मेरी फरमाइश दिनोंदिन बढ़ रही थी और मैं मेरे पति की हालत अब भी वैसी ही थी। अब सब कुछ मेरे बर्दाश्त के बाहर हो चुका था। मैंने सोचा कि अब तो रोहन ही है जो मेरी हेल्प कर सकता है। वैसे मेरे गांव में भी दो लड़के रहते थे जो खेती करते थे। वे भी मुझे देखते थे। जब भी मैं छत पर बाल सुखाने या कपड़े सुखाने जाती थी तो वह मुझे ही देखते और पहले तो
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मैंने सोचा कि उनमें से एक को पकड़ लूं ताकि कुछ समय के लिए काम चल जाए। लेकिन फिर मैंने सोचा कि मैं इस घर की इज्जत हूं और कल को पता नहीं इनमें से कौन मुझे या मेरे पति को बदनाम कर दे। इसलिए मैंने उन्हें भाव नहीं दिया। लेकिन रोहन तो घर का ही है इसलिए मैंने सोच लिया कि वही मेरी हेल्प कर सकता है। आज मैंने पक्का प्लान बना लिया कि आज रोहन हेल्प ले ही लूंगी। उसके बाद मैं रसोई में खाना बनाने चली गई। जैसे ही रोहन नहाकर फ्रेश होने के बाद रसोई में आया। मैंने दूध निकालने का बहाना बना दिया। मैं रसोई घर में ही लेटे
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से दूध निकाल रही थी। मेरी बेटी अभी नानी के घर गई हुई थी क्योंकि घर में उसे संभालने वाला कोई नहीं था। इसलिए अब बाकी का दूध निकालना पड़ता था और घर में मेरे पति और रोहन के अलावा कोई नहीं था। तो मुझे डर भी नहीं लग रहा था। जैसे ही रोहन अंदर आया, वह मुझे देखकर एकदम घबरा गया और कहने लगा, "सॉरी भाभी, मुझे माफ कर दो। मैंने देखा नहीं और बाहर जाने लगा।" तभी मैंने उसे रोक लिया। अरे रोहन क्या हुआ? कोई बात नहीं अंदर आ जाओ।" रोहन बोला, अरे भाभी, ऐसे मैं अंदर कैसे आऊं? मैंने कहा, "ऐसेवैसे मत करो और जल्दी से आकर मेरी मदद
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करो।" रोहन का मन भी कर रहा था लेकिन मैं उसकी भाभी थी इसलिए वह थोड़ा अनकंफर्टेबल फील कर रहा था। फिर मैंने उसे कहा अरे इतना क्यों शर्मा रहे हो? अब जल्दी से आओ और मेरी मदद करो। धीरे-धीरे रोहन रसोई में आ गया और पास आकर खड़ा हो गया। वह मुझे देखता ही रह गया। तभी मैंने कहा ऐसे क्या घूर रहे हो? क्या तुमने आज तक नहीं देखा? रोहन बोला मां कसम भाभी मैं आपको बता नहीं सकता कि मुझे कैसा लग रहा है। बहुत ही अच्छा है भाभी मैंने कहा तारीफें करना छोड़ो और यहां मेरी मदद करो। तभी रोहन बोला भाभी मुझे नहीं आता। कैसे करना है?
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तो मैंने कहा अरे बुद्धू इसमें कुछ नहीं करना। यह लो पकड़ो और बस धीरे-धीरे निकालो। थोड़ी देर बाद जब रोहन के हेल्प में हाथ तेज होने लगे तो मैंने सोचा कि अब मेरा आगे झुककर सही में काम करने का समय है। मगर जैसे ही मैं झुकने लगी तो देखा कि रोहन का काम तो पहले ही खत्म हो चुका था। उसे देखकर मेरा मन बहुत उदास हुआ। लेकिन फिर भी मेरी हंसी निकल पड़ी। मैंने नाराजगी से रोहन को मारते हुए कहा। यह क्या किया पागल तूने? तो शुरू होने से पहले ही खत्म कर दिया। इसके बाद जैसे ही रोहन का नशा उतरा उसने हड़बड़ाकर हुए कहा सॉरी भाभी सॉरी वो
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मैंने ऐसा काम पहले कभी नहीं किया इसलिए मुझसे ऐसा हो गया। मैं अभी जाकर साफ करके आता हूं और उसने मेरे एक भी बात नहीं सुनी और तुरंत रसोई से चला गया। मैंने भी उसे ज्यादा रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि मैं समझ चुकी थी कि यह उसके लिए इतना आसान नहीं होगा। इस चक्कर में आज खाना भी लेट हो गया था। इसलिए मैंने जल्दी से खाना तैयार किया और राजू को कमरे में देने के लिए चली गई। राजू भी बैठे-बैठे खाने का इंतजार कर रहे थे। राजू बिल्कुल सीधे-साधे और सरल स्वभाव वाले आदमी हैं। वह मेरी बहुत बहुत चिंता करते हैं। जब मैं उनके लिए खाना
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लेकर गई तो पूरा पसीने से भीगी हुई थी। मुझे देखकर वह बोले, इतनी जल्दबाजी क्यों करती हो नेहा? धीरे-धीरे काम कर लिया करो ना। देखो तुमने अपना क्या हाल बना लिया है। तब मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा यह तो कुछ भी नहीं है। जब तुम काम करते हो तो मेरा इससे भी बुरा हाल हो जाता है और तब तो मैं तुम्हें रुकने के लिए भी कहती हूं। लेकिन तुम तो नो कहकर काम की स्पीड को दुगना कर देते हो। मेरे मुंह में ऐसा सुनकर मेरे पति मुस्कुराने लगे। तुम भी ना नेहा कहां की बात कहां ले जाती हो।
इसके बाद राजू ने खाना खा लिया और मैंने उन्हें
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दवाई भी दे दी। दवाई लेने के बाद उन्हें नींद आ गई और वह आराम करने लगे। मैं भी काफी थक चुकी थी इसलिए मैं नहा धोकर फ्रेश हो गई। इसके बाद मैं रोहन के कमरे में उसे देखने के लिए तो वहीं भी सो चुका था। फिर मैं भी आकर आराम से करने लगी। शाम को जब मैं रोहन को चाय देने गई तो वह बैठा फोन चला रहा था। मुझे देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। मैं भी उसे देखकर हंसने लगी और मैंने उससे पूछ लिया क्या बात है रोहन आज तो तुम काफी ढीले-ढीले से लग रहे हो। रोहन बोला भाभी वह मैंने पहली बार काम ऐसा अनुभव लिया है। प्लीज आप बुरा ना मत
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मानना। मैं सच बता रहा हूं। बिल्कुल मेरे से काम नहीं कर पाया। तभी मैंने उसे रोकते हुए कहा, अरे बेवकूफ मैं कब बुरा मानेंगी लगी? वैसे सच बताऊं तो मुझे भी अच्छा लग रहा था। इसके बाद मैंने रोहन को चाय पकड़ा दी और उसके साथ बैठकर पीने लगी। हम दोनों बातें करने लगे। आज रोहन के मुंह से मेरे लिए तो फूल ही झड़ रहे थे। वह बस मेरी तरफ ही करता जा रहा था। भाभी आप बहुत अच्छी हो। मैं तो सोच रही हूं कि सारी उम्र आपके ही घर रहूं। इन 14 दिन में मुझे स्वर्ग जैसा महसूस होने लगा है। और ऊपर से आपकी खूबसूरती मैंने मुस्कुराते हुए कहा। आज तो
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तुम्हारे मुंह से सिर्फ तारीफें ही निकल रही हैं। लगता है रोहन मेरा हाथ पकड़ कर बोला। आप सही कह रही हैं भाभी। अब आपको भी मेरे काम में मेरी मदद करनी होगी। अब तो आपको मेरी बात माननी ही होगी। प्लीज भाभी मना मत करना। बस एक बार के लिए मेरी काम वाली बन जाओ। इसके बाद आप जो भी कहेंगी मैं करूंगा। जब रोहन सब कह रहा था तो उसका चेहरा लाल टमाटर जैसे हो गया था और मेरी मुस्कुराहट फूट पड़ी थी। मैंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा, अरे पगले इतना सीरियस क्यों हो रहे हो? बताओ मैंने तुम्हें कभी किसी चीज के लिए मना किया है? वैसे भी अब
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तुम्हारे भैया तो वैसा भी मेरे काम में मेरी मदद नहीं कर पाते हैं। और तुम इतना शर्माओ मत। अगर इतना शर्माओगे तो कैसे चलेगा? अब से तुम मुझे अपनी भाभी नहीं बल्कि काम वाली ही समझना। रोहन बोला भाभी एक बात और है। मेरा तो मेरा तो काम करते ही लेकिन जाता है। बहुत काम करता हूं। मैंने उसे कहा इसकी चिंता मत करो। इसका इंतजाम मैं कर दूंगी। तुम बस काम के लिए तैयार रहना। मेरे इतना कहते ही रोहन खुश हो गया और उसने थैंक्स भाभी की रट लगा दी। कहने लगा भाभी आप बहुत अच्छी हैं। इसके बाद मैं चली गई क्योंकि शाम को रही थी और
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मुझे राजू को नहलाना भी था। जब राजू जी नहा लिए तो रोहन उन्हें बाहर टहलाने ले गया। इसके बाद मैंने जल्दी-जल्दी सारा काम किया और उनके आने तक खाने की तैयारी कर दिया। आते ही रोहन ने हाथ पैर धोए और खाना खाने के लिए बैठ गए। इतने में 9:00 बज चुके थे और स की दवाइयां का समय हो रहा था। इसलिए मैं उन्हें कमरे में ले गई और दवाइयां दे दी। राजू को मेडिसिन में नींद की गोलियां भी थी ताकि उन्हें ज्यादा दर्द ना हो और आसानी से नींद आ जाए। राजू दवाइयां लेकर जल्दी से सो गए। मैं उनका सर दबा रही थी। जैसे ही मुझे पता चला कि राजू
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सो चुके हैं, मैं नहाने चली गई। नहाकर मैंने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी। बालों का जोड़ा बना लिया और महक के लिए परफ्यूम भी लगा लिया। वैसे तो मैं मेकअप कभी कभार ही करती थी करती थी। लेकिन आज थोड़ा-थोड़ा कर ही लिया ताकि चेहरा ब्लश करे। पूरी तरह से तैयार होने के बाद मैंने अपनी अलमारी से ताकत वाली गोलियां निकाली जो कभी कभार राजू लेते थे और रसोई में चली गई। मैंने हल्दी बादाम वाला दूध तैयार किया और उसमें एक गोली डाल दी ताकि रोहन को थोड़ी ताकत मिल सके। ऐसा करते-करते रात के 11:00 बज चुके थे। फिर मैंने जल्दी से दूध का गिलास
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लिया और रोहन के कमरे में चली गई। रोहन बड़े ध्यान से मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं अंदर आई, वह खड़ा हो गया और मुझे देखने लगा। जब वह कुछ नहीं बोला, तो मैंने ही पूछ लिया, ऐसा क्या देख रहे हो? बताओ मैं कैसी लग रही हूं। रोहन ने संकोच में कहा, "भाभी, मन तो ऐसा कर रहा है कि आपको अभी खा जाऊं।" मैंने हंसते हुए उसे दूध का गिलास पकड़ा दिया और कहा, "मुझे खाने की जरूरत नहीं है। बस तुम इसे पी लो।" रोहन ने जल्दी से गिलास पकड़ा और एक सांस में दूध पी गया। दूध पीते ही मैंने कहा चलो अब जल्दी से पूजा शुरू करते हैं।
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रोहन ने जवाब दिया भाभी पूजा तो शुरू कर दूंगा लेकिन आप दिए में तेल डालोगी या फिर सीधे ही पूजा करवाओगी। मैंने मुस्कुराते हुए कहा तुम मेरी चिंता मत करो। मैं पहले से ही तेल डालकर आई हूं। इसके बाद जो इसके बाद जो हुआ वह बताते हुए मुझे भी शर्मा रही है। मैं रोहन को अब तक बच्चा ही समझ रही थी। लेकिन उसने पूजा में मेरे पति को भी पीछे छोड़ दिया। रोहन ने सबसे पहले गुलाब जामुन का स्वाद खाया। मेरे पति ने आज तक गुलाब जामुन नहीं खाया। वह तो सीधे ही पूजा शुरू कर देते थे। जब मैंने रोहन से कहा, अब बस भी करो और कितना खाओगे? तो
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उसने जवाब दिया, नहीं भाभी, आपको नहीं पता यह कितना मीठा है। इसी के लिए हम पागल रहते हैं। यह रोहन की पहली पूजा थी। इसलिए वह आधे घंटे से ज्यादा नहीं कर पाया। तो मैं ज्यादा नहीं थकी लेकिन रोहन पसीने-पसीना हो चुका था। मुझे भी 2 महीने बाद पूजन का काम मिल रहा था तो मैं भी बहुत खुश थी। इसके बाद रोहन थक चुका था और आराम करने लगा। मैं भी वहीं पर थी जब मैंने उससे पूछा कैसा लगा फर्स्ट टाइम पूजा करते तो रोहन ने जवाब दिया भाभी सच कहूं तो ऐसा लगा जैसे जिंदगी के सारे सुख एक साथ मिल गए या कहूं तो दुनिया की सबसे अच्छी भाभी हो। फिर हम बातें करते-करते सो
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गए। सुबह जब मैं उठी तो बिल्कुल फ्रेश महसूस कर रही थी। मैंने उठकर चाय नाश्ता बना लिया और राजू को दे आई। इसके बाद मैं रोहन को भी चाय देने के लिए उसके कमरे में गई। वह भी उठ चुका था। चाय लेकर उसने मुझसे पूछा, "भाभी, मुझे डर लग रहा है। कभी हमने कुछ गलत पूजा तो नहीं कर ली?" मुझे लगा कि शायद रोहन को पछतावा हो रहा है। मैंने उसे समझाते हुए कहा, "रोहन, तुम ऐसा बिल्कुल मत सोचो।" सच कहूं तो यह मेरी मजबूरी थी क्योंकि तुम्हारे भैया 7 आठ महीने तक ठीक नहीं हो सकते। और मुझसे इतना इंतजार शायद ही हो पाता। लेकिन तुमने मेरी
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बहुत मदद की है पूजा करने में। प्लीज तुम इतनी टेंशन मत लो। और हां इसके बारे में किसी से भी मत कहना। रोहन ने सर हिला दिया और बोला भाभी अगर यह मेरी मजबूरी बन गई तो मैंने कहां आ जाना फिर अपनी भाभी के पास मैंने कब तुम्हें मना के किया है। इतना कहकर मैं मुस्कुराने लगी और रोहन फिर से मेरी तारीफ करने लगा। भाभी आपकी जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। पता नहीं मैंने पिछले जन्म में कौन से पुण्य किए थे जो मुझे आप जैसी भाभी मिली। इसके बाद मेरे और रोहन के बीच पक्की वाली दोस्ती हो गई थी। अब जब भी मेरा मन करता मैं रोहन से पूजन
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करवा लेती। इसी बीच रोहन के पापा ने फोन भी किया था कि वह घर आ जाए। लेकिन रोहन ने मना कर दिया। अब मेरे पति राजू भी चलने फिरने लगे थे। तो हम लोग बाजार भी घूमने लगे। रोहन अब मेरी और ज्यादा केयर करने लगा था। शाम को जब भी मैं सुलाकर रोहन के पास जाती तो वह मेरे पैर दबाता, कमर की मालिश करता और सर भी दबाता। मैं रोहन से कहा भी करती थी कि मेरे लिए इतना काम करने की जरूरत नहीं है। लेकिन वह नहीं मानता और कहता चुप रहो भाभी आप सारा दिन काम करती रहती हो। इसलिए थक जाती हो। तो इतना तो मुझे भी करने दो। दोस्तों शायद आप लोगों
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को मैं बिल्कुल भी पसंद ना आऊं क्योंकि मैंने इसके रिश्ते को खराब किया है। लेकिन सच कहूं तो मैं भी ऐसा करना नहीं चाहती थी लेकिन भावनाओं में सब कुछ हो गया। इसलिए प्लीज आप लोग समझने की कोशिश करना और मेरी कहानी को सुनकर भावनाओं में मत बह जाना क्योंकि सच में यह गलत बात होती है तो मेरे खातिर कमेंट में एक प्रॉमिस जरूर करके जाइए कि आप लोग अपने जीवन में ऐसा कभी नहीं करेंगे। स्टोरी की शिक्षा यह कहानी हमें कई महत्वपूर्ण सबक देती है जो हमारे जीवन में काम आ सकते हैं। आइए हम इन शिक्षकों को विस्तार में समझते हैं। कहानी
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में नेहा अपने पति राजू की देखभाल करती है। जब वह दुर्घटना में घायल होते हैं। यह दिखाता है कि जिम्मेदारी का मतलब केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए जीना नहीं है बल्कि अपने प्रियजनों की देखभाल करना भी शामिल है। जीवन में जब हम किसी रिश्ते में होते हैं तो हमें अपनी साथी के प्रति समर्पित रहना चाहिए तो वह अधिक मजबूत और स्थाई होते हैं। हमें अपने रिश्ते में ईमानदारी रखना चाहिए और एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिए। तो दोस्तों, आपको यह कहानी कैसी लगी? कमेंट में हमें जरूर बताएं और अगर चैनल पर पहली बार आए हो, तो चैनल को
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